Feziya khan

Add To collaction

धीरे धीरे से भाग --- 15




स्टेशन पहुंच गयें थे मोहन, रिया और सिद्धार्थ अपने दोस्तों के साथ, पर अभी तक दीप्ती नहीं आई थी,,,


दीप्ती को रिया ने कॉल करके पूछा तो उसने कहा की वो रास्ते मे है कुछ देर मे पहुंच जाएगी, दीप्ती सुबह टाइम से ही घर से निकली थी पर रास्ते मे जाम होने के कारण वो लेट हो गयी थी,,,,,


मोहन बड़ी ही बेचैनी से दीप्ती का इंतज़ार कर रहा था बार बार गेट पर देखता की आ गयी क्या पर ज़ब भी उसने देखा उसे कोई और ही दिखा पर दीप्ती नहीं,,,,,,

रिया मोहन को देख कर मुस्कुराई और उस के पास आ पर बोली! क्या हुआ मोहन क्यों इतना परेशान हो वो आ जाएगी समय से हम सब उसे लेकर ही जाएँगे ना की छोड़कर,,,,,,


मोहन रिया की शक्ल देख रहा था की इसको कैसे पता लगा की वो दीप्ती का इंतज़ार कर रहा है वो हकलाते हुए बोला,, नहीं नहीं वो तो मुझे भी पता है आ ही जाएगी मै कोई उसका इंतज़ार थोड़ी कर रहा हूँ वो तो मै ट्रेन मे ज़ब भी जाता हूँ ना वो एक होला सा पेट मे उठने लगता है एक अजीब सा होता है तू नहीं समझेगी देख कुछ लोगो को गाड़ी या बस मे बैठते है तो अजीव सा होता है ऐसे ही मुझे ट्रेन मे बैठने मे होता है इसलिए मै तो बस बाहर टहल रहा हूँ,,,,,

उस पागल का वेट कौन करें मै तो कभी नहीं और ये सोचियो भी मत कभी की मुझे उसकी फ़िक्र है,,,,,


 रिया मुस्कुराई और बोली हां हां सही है तू अपने पेट के होले को संभाल और मैं दीप्ति को देखती हूं तू भला क्यों देखेगा उसको मैं तो बस ऐसे ही बोल रही थी और मुस्कुराते हुए आगे गेट की और बढ़ गयी,,,,,


 मोहन ने झेपते हुए अपना सर हां मैं हिला दिया,, वो कहता भी क्या रिया से वह नहीं चाहता कि उसके प्यार के बारे में किसी को भी पता चले अगर उसे सारी जिंदगी भी दीप्ति के प्यार को अपने दिल में बसा के रखना पड़े तो उसे वह भी मंजूर था पर कोई उसकी दीप्ती पर उंगली उठाए उसे जरा भी पसंद नहीं था,,,,,,

 जरूरी तो नहीं है कि हर किसी को उसका प्यार मिले, प्यार त्याग का दूसरा नाम भी है जो मोहन निभा रहा था अपनी फीलिंग को अपने ही अंदर रखा था, उसे पसंद नहीं था कि दीप्ति और उसको लेकर लोग उसके बारे में कोई गलतफहमियां फैलाएं,


आज तक किसी ने भी दीप्ती को इस नजर से नहीं देखा था जैसे और लड़कियां होती हैं कभी किसी के साथ नज़र आती हैं तो कभी किसी के साथ नजर आते हैं,,,,

 दीपिका एक पाक साफ दमन की लड़की थी जिस पर एक छिट भी मोहन बर्दाश्त नहीं कर सकता था वह जानता था कि दीप्ती और उसकी शादी कभी नहीं हो सकती उसकी फैमिली कभी भी लव मैरिज को सपोर्ट नहीं करेगी, दीप्ती के घर वालों का भी उसे पता नहीं था कि उनका रवैया कैसा रहेगा जब उन्हें अपनी बेटी के प्यार के बारे में पता लगेगा क्या वह इस शादी से राजी होंगे या नहीं वह नहीं जानता था,,,


वो चाहता तो दीप्ति को अपने प्यार का एहसास करा सकता था वो चाहता तो दीप्ती के अंदर भी अपने प्यार का एहसास को जगा सकता था पर उसने सोच क्या फायदा इस प्यार को क्यों हवा दे, दोनों के ही दिल टूटेंगे जुदाई ही उनके नसीब मे आएगी तो वो दीप्ती को इस दर्द से गुजरने ही नहीं देना चाहता था वो दीप्ती को दुखी होते हुए देखे इससे पहले मर जाना पसंद करता,,,

.बहुत प्यार करता था मोहन दीप्ती से वो उसे दूर से देख कर ही खुश था उसे अपनी ज़िन्दगी से कुछ नहीं चाहिए था दीप्ती की ख़ुशी ही उसके लिए सब से पहले थी सब तक साथ है वो उसके साथ बिताये हुए पलो को अपनी आँखो मे कैद कर लेना चाहता था इस उसकी आगे की ज़िन्दगी भी आराम से निकल जाए वो उसकी यादो मे ही अपनी पूरी ज़िन्दगी जी लेगा,,,,,,



दीप्ती ने आते ही उसके सर पर एक चपेट लगाई और बोला ,,,, ओह मोहन प्यार जागो नहीं तो यही रह जाओगे,,,

मोहन अपनी सोच से बाहर आया और सामने दीप्ती को खड़ा देख कर बहुत खुश हुआ और बोला तुम आ गयी,,


 दीप्ति बोली, हां मैं तो आ गयी पर तू अब अपनी नींद से बाहर निकल,,,,,


अरे यर तू भी ना मोहन ने दीप्ती को कंधो से पकड़ा और अपने डब्बे की और बढ़ा ही था की रिया ने आवाज़ लगा दी वह बेटा उसके आते ही तो सब कुछ भूल गया अब तो तुझे कोई और दिखाई नहीं दे रहा कि हम भी खड़े हैं राहों में,,,

 मोहन ने अपने दांत के नीचे जबान दबाई और बोला अरे यर तू भी ना तुझे कैसे भूल सकता हूँ तू कभी मुझे भूलने भी देगी,,,,,,


उसने रिया का हाथ पकड़ और तीनो आगे बढ़ गयें सीट पर बैठते ही रिया बार बार मोहन को नोटिस कर रही थी कुछ देर पहले के मोहन और अब के मोहन को कंपेयर कर रही थी दोनों में कुछ ही पल में कितना अंतर आ गया था, कुछ देर पहले का मोहन पड़ा हताश देख रहा था और अब के मोहन में चंचलता और उत्साह साफ साफ दिखाई दे रहा था,,,,


रिया को लग रहा था जरूर मोहन के दिल मे दीप्ती के लिए कुछ है अगर वो सही सोच रही है तो मोहन का दीप्ती से एक गहरा नाता है या रिश्ता बहले ही अभी तक किसी ने भी नाम नहीं दिया है पर दोनों के बीच कुछ तो है अभी तक कभी उसने ये नोटिस नहीं किया था क्या दीप्ती के मन मे कुछ है या नहीं 
अब रिया को ये पता लगाना था मोहन की तो फीलिंग उसे साफ साफ दिखाई दे रही थी अगर वो अपने आँखो से देखे तो उसे भी कही ना कही लग रहा था की दीप्ती  मोहन के साथ साथ बहुत अच्छा फील कर रही है,,,,



अब आगे क्या करेंगी  रिया मोहन का सच  दीप्ती को बता देगी या दीप्ती को ही उसके प्यार का एहसास करा देगी,,,,,  जानने के लिए अगले भाग मे जुड़े रहे मेरे sa








   9
1 Comments

Rekha

22-Aug-2023 06:56 PM

very nice

Reply